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झंडा ऊँचा रहे....

Posted On: 12 Aug, 2014 Others,lifestyle,Technology में

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मेरे मोबाइल के व्हाट्सऐप में अस्सी कॉन्टेक्ट्स हैं. जिसमे से लगभग साठ लोगों ने अपनी प्रोफाइल की फोटो में आजकल तिरंगा झंडा लगा रखा है, फेसबुक पर जाने का कई दिनों से मौका नहीं मिला लेकिन जानती हूँ कि वहां भी कमोबेश यही हाल होगा….15 अगस्त आने वाला है न.. …मैं सच बताऊँ, आप लोग बुरा न मानें, मुझे ये एक अजीब तरह का ढोंग लगता है..15 अगस्त या छब्बीस जनवरी आने को हो तो तिरंगा लगा लो..दीपावली में दीपक लगा लो, होली में पिचकारी लगा लो, दशहरे में रावण लगा लो, नागपंचमी में नाग लगा लो…क्या मज़ाक है..मैं सोचती हूँ लोगो को रात में चिंता के मारे नींद नहीं आती होगी की कल कौन सी प्रोफाइल पिक्चर लगानी है..
सोचिये , क्या तिरंगे झंडे की फोटो भर लगा लेने से देश के प्रति सारी ज़िम्मेदारी ख़त्म हो जाती है..आज से कुछ साल पहले जब मोबाइल में सिर्फ टेक्स्ट मैसेज आया करते थे तब अक्सर 15 अगस्त को मेरे पास तिरंगे झंडे का रेखाचित्र बना हुआ sms आता था और नीचे लिखा रहता था,,,”हैप्पी रिपब्लिक डे “..
कहना न होगा कि आठ महीने पहले 26 जनवरी को आया हुआ sms लोग बिना एडिट किये हुए जल्दबाज़ी में फॉरवर्ड कर देते थे और देशभक्ति का दिखावा करने का बवाल खत्म..
स्कूलों और सरकारी ऑफिस में झंडारोहण एक अलग बात है..स्कूलों में अपने देश के झंडे का महत्त्व बता कर , गर्व और अभिमान की भावना जगाई जाती है ताकि आगे चल कर देश के प्रति सम्मान , अर्पण और उत्सर्ग की भावना पनपे..कार्यालयों में इस भावना को पोषित किया जाता है..लेकिन फिर भी हम में से बहुत लोग फ्लैग कोड के बारे में ठीक से जानते भी न होंगे.


नेशनल फ्लैग कोड ऑफ़ इंडिया के अनुसार झंडे का माप 150 x 100 मिमी से कम नहीं होना चाहिए ..मोबाइल और फेसबुक की प्रोफाइल पिक्चर में झंडे का साइज कितना होता है ये तो लगाने वाले ने कभी जानने की कोशिश भी नहीं की होती है..


इसी प्रकार, फ्लैग कोड के पार्ट II के section 1 में ,बिंदु 2.1 में साफ साफ लिखा है कि सामान्य जनता झंडे का प्रयोग कर सकती है लेकिन अनुचित या असम्मानजनक व्यवहार करने पर अधिकतम तीन साल की जेल या जुरमाना या दोनों ही हो सकता है..
आगे असम्मानजनक व्यवहार की परिभाषा भी बताई गयी है ..जिसमे राष्ट्रीय प्रतीक को व्यक्तिगत रूप से प्रयोग करना , उसे अपने प्रचार, परिधान या पहचान का हिस्सा बनाना आदि है….
( continue to use, for the purpose of any trade, business, calling or profession, or in the title of any
patent, or in any trade mark of design, any name or emblem specified in the Schedule or any colourable
imitation thereof without the previous permission of the Central Government or of such officer of
Government as may be authorised in this behalf by the Central Government. )
फिर भी आप देखिये कि लोगों ने अपनी अपनी प्रोफाइल पिक्चर को ज़्यादा शानदार बनाने के लिए तिरंगे झंडे के साथ जम कर प्रयोग किये हैं..कहीं तितली के पंखों पर तिरंगे के तीन रंग उकेरे हुए हैं, कहीं शीशे के गिलास में तीन रंग का पानी है (पता नहीं पानी है या कौन सा पेय है…), तो कहीं बहती हवाओं में शामिल तिरंगे के तीन रंगो का एहसास है….वैसे कला की दृष्टि से देखा जाये तो कलाकार यदि इस प्रकार की प्रयोगधर्मिता न अपनाये तो कभी कोई नवप्रवर्तन ही न हो..खुद हमारे फ्लैग कोड के अनुसार तिरंगे में शामिल चक्र का भी यही अर्थ है …


चक्र अर्थात, जीवन की निरन्तरशीलता ही प्रगति का मूल है, रुक जाने पर तो जीवन ही ख़त्म हो जाता है..फिर भी ,जब तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाते समय उसके रंग रूप, डिज़ाइन , प्रयोग और सम्मान के लिए एक आचार संहिता बनायीं गयी है , और उसका उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान है, तो फिर उसके ही साथ प्रयोग करने की क्या ज़िद है…


और तो और इस साल एक नया शोशा छिड़ा हुआ है…
एक दो दिन पहले मुझे व्हाट्सऐप पर एक मैसेज मिला जो इस प्रकार था…
“”"मित्रों…..
आजकल आपको एक मैसेज ज़रूर आता होगा जिसमे एक भारत का झंडा आता है और उसको १५ अगस्त तक अपनी प्रोफाइल पिक्चर बनाने के लिए आग्रह किया जाता है..
पर क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि उस झंडे में केसरिया रंग की जगह लाल रंग का प्रयोग हुआ है, ..ये फोटो कश्मीरी आतंकवादियों के साइबर हमले का अगला कदम है..इसको उन्होंने ‘मोबोला” नाम दिया है..(मोबाइल अबोला ).. ये फोटो एक स्लीपर सेल की तरह काम करेगी और इसको जब 15 अगस्त को वो आतंकवादी एक्टिवेट करेंगे तब ये आपका सारा निजी डेटा उनको भेज देगी और आपको भनक तक नहीं लगेगी ..इसलिए भारत का झंडा अवश्य लगाएं पर केसरिया रंग वाला और अपने देश को साइबर हमले से बचाएं..
“”"….जय भारत जय हिन्द….””’


अब एक नयी कहानी शुरू हो गयी है……


इस मैसेज को पढ़ कर तिरंगे झंडे की प्रोफाइल पिक वाले लोग घबराये हुए हैं..तिरंगा हटा दें तो देशभक्ति खतरे में आ जाती है और जेन्युइन झंडे की विशुद्ध फोटो इतने कम समय में ढूंढ ढांढ कर लगाना काफी कठिन काम है..इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी अचानक से सर पे आ गयी.. देश को साइबर हमले से बचाना है..व्हाट्सऐप के ज़रिये देश की सीमा को सुरक्षित करना है….मन में ऐसी ऐसी भावनाएं हिलोरें ले रही हैं की क्या बताया जाये..

ये वही देशभक्त लोग हैं जिनको अगर विदेशों में ज़्यादा सैलरी के पैकेज वाली कोई जॉब मिल रही हो तो घर , खेत बेच के उससे पासपोर्ट, वीज़ा और टिकेट का इंतेज़ाम कर के देश छोड़ के चले जाते हैं..हाँ उनके प्रोफाइल पिक में 15 अगस्त के दिनों में शायद तिरंगा तब भी लगा हुआ मिले..


चलिए कोई बात नहीं ..इंसान भूखा रह कर तो देशभक्ति करेगा नहीं…पेट भरने के लिए विदेश चले जाना तो एक मज़बूरी हो सकती है ..लेकिन तिरंगे की प्रोफाइल पिक लगाने वाले ऐसे भी लोग मिलेंगे जो अगर दस मित्रों के साथ खड़े हों और कोई ग्यारहवां आ कर अंग्रेजी में बोलने लगे तो ये दसों अपनी सारी बात चीत भूल के उस ग्यारहवें आंग्ल भाषी को मुंह फाड़ के देखने लगते हैं , उसके लिए भीड़ में रास्ता बना देते हैं, ट्रेन और बस में बैठने की जगह दे देते हैं और उससे मित्रता बढ़ाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाते हैं….

वैसे हमारे लिए एक समय पर तिरंगा ओढ़ने की इजाज़त है….
जब हमने राष्ट्र के लिए कोई महान कार्य किया हो , देश की शान और सम्मान की राह में अपना सब कुछ न्योछावर कर के शहादत प्राप्त कर ली हो तो…..


लोगों को शौक होता है कि मैं भी कभी तिरंगा ओढूँ ..लेकिन ..फिर सोचते हैं कि देशभक्ति के लिए आखिर करें तो क्या करें..


सीमा पर जा सकते तो सर कटा देते ,पर वो तो कर नहीं सकते क्योंकि अभी  दूसरे बहुत काम हैं……


.. घर में बिजली का बिल बहुत आता है..इलेक्ट्रीशियन को बुला कर लाइन में कोई लोचा करवाना है ताकि रीडिंग कम हो जाये .
बेटे को एग्जाम में ज्यादा नंबर दिलवाने के लिए कोई सोर्स लगवाना है ताकि नौकरी मिलने में परशानी न हो
..वैसे परेशानी होनी नहीं चाहिए क्योंकि गांव वाले चाचा के साले के पट्टीदार का भांजा सचिवालय में है..मंत्री जी से उसकी बहुत बनती है ..कइयों का उसने बेड़ा पार करवाया है हाँ पर पैसा बहुत देना पड़ेगा…तो तनख्वाह भर से तो काम चलेगा नहीं…थोड़ी ऊपर की कमाई करनी पड़ेगी..

आदि इत्यादि …देश के काम न आ सकने के लिए फुर्सत न मिलने के बहुत से कारण गिनाये जा सकते हैं….

लेकिन सोचने वाली बात है कि देश की सेवा करने के लिए सीमा पर जा कर सर कटाने के सिवा और भी रास्ते हैं.. ..

भारत की असैन्य जनता को सोचना चाहिए कि तिरंगे का सम्मान प्रोफाइल की पिक्चर बनाने से नहीं होता…

जब हमारे भारत देश के नागरिक शिक्षा, तकनीकी, कला या खेल आदि के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर कोई महान उपलब्धि प्राप्त करते हैं और अंतर्राष्ट्रीय पटल पर उनका सम्मान किया जाता है , उस समय बहुत सारे झंडों के बीच में जब भारत के राष्ट्रगान के साथ हमारा तिरंगा शान के साथ सर ऊँचा कर के , झूम के लहराता है , तब उस दृश्य को देख कर समूचे भारतवर्ष के प्रत्येक नागरिक को जो रोमांच होता है, मेरे विचार से यही तिरंगे का वास्तविक सम्मान होता है…


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31 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
January 2, 2015

आदरणीया सरिता सिन्हा जी ! आपको और आपके समस्त परिवार को नववर्ष की बहुत बहुत बधाई ! नववर्ष में इस मंच पर आपकी वैचारिक उपस्थिति शीघ्र होगी, हमसब लोग यही आशा करते हैं !

yogi sarswat के द्वारा
August 20, 2014

15 अगस्त हो या 26 जनवरी , अब ये प्रतीकात्मक ज्यादा हो गए हैं ! जब जहां देशभक्ति दिखाने की जरुरत होती है वहां हम बिलकुल पीछे खड़े हो जाते हैं ! बहुत कुछ है अभी जहां देशभक्ति वास्तव में दिखाई जा सकती है , सिर्फ प्रोफाइल में तिरंगा लगा देने से कुछ नही होने वाला ! और आपकी बात , आप तो जब भी लिखती हैं तार्किक और कटु सत्य होता है आपके ब्लॉग में !

    sinsera के द्वारा
    August 27, 2014

    आदरणीय योगी जी नमस्कार, …..देर से उत्तर देने के लिए क्षमा चाहती हूँ…मेरी लेखनी को दिया सम्मान आपके स्नेह का सूचक है, इसके लिए धन्यवाद…आप सही कहते हैं ..अभी तो देश को आज़ादी दिलाने के लिए बहुत कुछ करना बाकी है…मुझे लगता है की अभी हम पूरी तरह आज़ाद ही नहीं हुए हैं…

Santlal Karun के द्वारा
August 19, 2014

आदरणीया सरिता जी, इस मौलिक, तथ्यात्मक, तार्किक, विचारोतेजक तथा विचारणीय आलेख के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    sinsera के द्वारा
    August 27, 2014

    आदरणीय संतलाल जी नमस्कार,…. देर से उत्तर देने के लिए क्षमा चाहती हूँ…आपके कीमती समय व प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद..

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
August 19, 2014

सरिता जी अभिनन्दन आपको इस लेख के लिए विषय खोजना और विषय पर सटीक विवेचना वास्तव मैं गूढ़ विषयांतरण है भारतियों के लिए तो एक सम्मान सूचत प्रतीक ही है । ओम शांति शांति शांति 

    sinsera के द्वारा
    August 27, 2014

    आदरणीय हरिश्चंद्र जी, नमस्कार….दरअसल , मेरे ख्याल से विषयांतरण को रोकने के लिए सीधे विषय पर आ जाना चाहिए…विषय तो बिखरे पड़े हैं पर लोग बचने के लिए विषयांतर कर जाते हैं…कुछ ही लोग सच को स्वीकार कर उस पर अडिग रह पते हैं, जैसे कि पापी तो हम सभी हैं लेकिन स्वीकार आप जैसे विरले ही कर पाते हैं…. देर से उत्तर देने के लिए क्षमा चाहती हूँ…

yamunapathak के द्वारा
August 17, 2014

सरिता जी आप बहुत दिनों बाद आईं हैं आपका यह ब्लॉग बहुत ही उम्दा है.लिखते रहा करिये हम सब को आपके ब्लॉग का इंतज़ार रहता है साभार

    sinsera के द्वारा
    August 19, 2014

    प्रिय यमुना जी, नमस्कार, आप सब का स्नेह ही है जो मुझे यहाँ (मंच )पर जीवित रखे है ..इतने दिनों तक अनुपस्थित रहने पर भी आप लोग मुझे याद रखे होंगे इतना भरोसा रहता है…आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद..

Sumit के द्वारा
August 16, 2014

(y)

    sinsera के द्वारा
    August 16, 2014

    :-)

Shobha के द्वारा
August 16, 2014

आपने बहुत अच्छा लेख लिखा है जो वास्तविकता के समीप है आपने आखर मैं ‘जब हमारे भारत देश –यह सोने जैसे शब्द है मेरे विचार से यही तिरंगे का वास्तविक सम्मान है ‘ आपने बहुत अच्छा लिखा है मैने आपके विचार पहली बार पढ़े हैं बहुत प्रभावित हुई अब सब पढ़ रही हूँ डॉ शोभा l

    sinsera के द्वारा
    August 16, 2014

    आदरणीय शोभा जी, नमस्कार, मुलाकात देर से हुई लेकिन आगे चलती रहे ऐसी मेरी कामना है..समभाव के लिए धन्यवाद…

OM DIKSHIT के द्वारा
August 14, 2014

सरिता जी, नमस्कार. बहुत प्रतीक्षा कराया आप के लेख ने,बहुत देर कर दी,लेकिन जब आया तो धमाकेदार लेख.सहमत.सही बात तो यही है कि अब लेखकों की कमी नहीं है….कुछ भी लिखना है,चाहे वह अख़बार के अंश ही हों….कलम लेकर बैठे रहते हैं कुछ लोग.खबर आई और ….शब्दों की हेरा-फेरी करके छाप दिया….सामयिक जो है.और अगर कोई मेहनत करके लिखता है तो……बदबूदार टिप्पणी…से बाज नहीं आते.

    sinsera के द्वारा
    August 15, 2014

    आदरणीय ओम दीक्षित जी, नमस्कार..सर, हाइबरनेशन पीरियड चल रहा था…रिवाइवल में थोड़ा ज़्यादा समय लग गया….टीका टिप्पड़ी तो खैर होती ही रहती है इसी से तो पब्लिक की नब्ज़ का पता चलता है…हा लेख ज़रूर हर स्तर के आते हैं और पढ़ने वाले अपने स्तर के हिसाब से छांट लेते हैं….इसमें ज़्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है……आप यहां आये, अपना कीमती समय दिया , इसके लिए धन्यवाद..

deepak pande के द्वारा
August 14, 2014

आजकल आपको एक मैसेज ज़रूर आता होगा जिसमे एक भारत का झंडा आता है और उसको १५ अगस्त तक अपनी प्रोफाइल पिक्चर बनाने के लिए आग्रह किया जाता है.. पर क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि उस झंडे में केसरिया रंग की जगह लाल रंग का प्रयोग हुआ है, ..ये फोटो कश्मीरी आतंकवादियों के साइबर हमले का अगला कदम है..इसको उन्होंने ‘मोबोला” नाम दिया है..(मोबाइल अबोला ).. ये फोटो एक स्लीपर सेल की तरह काम करेगी और इसको जब 15 अगस्त को वो आतंकवादी एक्टिवेट करेंगे तब ये आपका सारा निजी डेटा उनको भेज देगी और आपको भनक तक नहीं लगेगी ..इसलिए भारत का झंडा अवश्य लगाएं पर केसरिया रंग वाला और अपने देश को साइबर हमले से बचाएं.. “””….जय भारत जय हिन्द….””’ kamaal ka lekhan sochne par vivash kar diya

    sinsera के द्वारा
    August 15, 2014

    दीपक पाण्डे जी, नमस्कार, लेख पर ध्यान देने और कीमती समय देने के लिए धन्यवाद..

Sufi Dhyan Muhammad के द्वारा
August 14, 2014

“जब तुम ख़ुद को भारतीय, मुस्लिम, इसाई या फिर कुछ और बुलाते हो, तो तुमने कभी विचार किया कि तुम हिंसक हो रहे हो? और तुम्हे पता है कि यह हिंसा क्यों है? क्योंकि, तुम्ह ख़ुद को पूरी मानवजाति से अलग कर रहे हो..!”- जे. कृष्णमूर्ति आपकी लेख सार्थक है लेकिन विचारणीय नहीं है| अप बस लोगों को ‘गिल्ट फील’ कराना चाह रही हैं, जो कि रुग्णता है| अब मेरा सवाल यह है कि कहीं आपको लोगों में गलती ढूंढने की आदत तो नहीं हो गयी है….?? क्योंकि जो प्रश्न आप उठा रही हैं वो सार्थक है, लेकिन फिर उसके बाद जो आप बाते कर रही हैं वह उससे भी ज्यादा निरर्थक है जो लोग अभी कर रहे हैं….!! अप बुद्धिमान विद्यार्थि की भांति बड़े-बड़े प्रश्न तो उठा देती हैं, लेकिन जब बात समाधानों की आती हैं तो आप उन्ही थोथी मूल्यों की दलीले देने लगती हैं जिससे सिवाय, लड़ाई, विनाश और उप्दर्व के आज तक कुछ नहीं हुआ है| “Nationalism is, after all, a false sentiment, stimulated by vested interests and used for imperialism and war.”- J. Krishnmurti

    sinsera के द्वारा
    August 14, 2014

    भाई सूफी जी, आपको पता है कि आप भारतीय क्यों है..??? क्योंकि ये महज़ एक इत्तेफाक है कि आप भारत में पैदा हो गए..ज़रा सा खिसक के रेड क्लिफ लाइन के उस पार पैदा हुए होते तो आज 14 अगस्त को ही स्वतंत्रता दिवस मना रहे होते..जहाँ तक मुझे लगता है मैं ने इस लेख में कोई प्रश्न तो उठाया ही नहीं..बात इतनी सी है कि इत्तेफाक ही सही लेकिन जिस देश में पैदा हुए हैं वहीँ के झंडे पार अभिमान करना है और वहीँ का राष्ट्रगान गाना है चाहे वो राष्ट्रभाषा में न हो कर किसी आंचलिक भाषा में हो और किसी नोबेल प्राइज विनर द्वारा किसी गोरे साहब की चाटुकारिता में लिखा गया हो….हम तो चुपचाप सर झुका कर इस बात को मानते चले आ रहे हैं…..लड़ाई , विनाश और उपद्रव तो तब होता जब हम इसके खिलाफ आवाज़ उठाते….(हम का मतलब सभी भारतवासी….आप भी .. ) ..हाँ, ज़्यादा किताबें पढ़ कर आप विचारकों के कोट रट लेने में भले ही प्रवीण हो गए हों लेकिन जीवन शैली सीखने के लिए अपनी खुद की सोच समझ के असूल बनाना सीखिये …धन्यवाद..

    Sonam के द्वारा
    August 14, 2014

    हाहाहाहाहाहाहाहा ………… हो गयी झंड …… :) :D

    Sufi Dhyan Muhammad के द्वारा
    August 14, 2014

    यह मैंने कब कहा कि मैं भारतीय हूँ…?? I don’t belong to any religion or national. You are projecting your thoughts on me. प्रश्न उठाने का मतलब प्रश्नवाच चिन्ह के साथ वाक्य को समाप्त करना नहीं होता है| “मैं सच बताऊँ, आप लोग बुरा न मानें, मुझे ये एक अजीब तरह का ढोंग लगता है..” यह लोग जो कर रहे हैं उसपर सवाल नहीं है क्या? संभवतः आपको मेरे कमेंट पर विचार करने से ज्यादा तिलमिलाहट में आकर जवाब देने की ज्यादा जल्दी थी| मैंने किसी के विचार का कोट नहीं किया है, मैं दुनिया के किसी भी विचारक से सहमत नहीं हूँ, हां कभी कोई विचारक की बात मेरे विचार से मेल खा जाती है तो मैं उसकी पीठ ठोक देता हूँ…मैंने बस वही किया था, यह महज इत्तेफाक है कि कृष्णमूर्ति का विचार मेरे विचार से मेल खा गया| और मैं जीवन सोच-समझकर और विचार करके नहीं जीता हूँ….जीवन हर क्षण नया है कोई भी पुराना विचार काम नहीं आ सकता है….मैं होशपूर्वक जीता हूँ, सोचपूर्वक या विचारपूर्वक नहीं….| Here, I would use Buddha’s word ‘right awareness’-सम्यक बोध…!!! अंतिम बात, देश, धर्म, जाति और स्वतंत्रा इत्यादि राजनितिक बातें हैं… कोई भी बच्चा किसी देश में पैदा नहीं होता है…. यह सारा अस्तित्व हमारा है और हम इसके है….!!!!

    sinsera के द्वारा
    August 15, 2014

    सूफी महोदय, स्वागत है, कृपया कमेंट पर विचार करने से ज्यादा तिलमिलाहट में आकर जवाब देने की ज्यादा जल्दी में न आएं….मैं ने कहा (हम का मतलब सभी भारतवासी….आप भी .. )..यहाँ सिर्फ आप से नहीं बल्कि वो सभी जो भारत में पैदा हुए हैं..उनसे मतलब है….भले ही वो माने या न माने , फिर भी वो भारतीय नागरिक हैं तो हैं…तभी तो बड़ी आज़ादी से भारत का अन्न पानी कहते हैं, यहाँ की ऑक्सीजन लेते हैं और भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराये गए रोज़गार के अवसर लेते हैं…कभी नहीं कहते कि” हम ने कब कहा कि हम भारतीय हैं..”….लेकिन यहाँ पर एक प्रश्न आप से और सिर्फ आप से है……स्कूल, कॉलेज, ऑफिस या पासपोर्ट के लिए फॉर्म भरते समय आप अपनी नागरिकता क्या लिखते हैं…….????????कही ये तो नहीं लिखते कि…. “कोई भी बच्चा किसी देश में पैदा नहीं होता है…. यह सारा अस्तित्व हमारा है और हम इसके है………”

    Sufi Dhyan Muhammad के द्वारा
    August 16, 2014

    हम्म्म्म…..मैं वहीं तक भारतीय हूँ जहाँ तक यह बात युटिलिटेरीअन है…और जब मैं कहता हूँ कि मैं भारतीय नहीं हूँ तो मेरा मतलब साइकोलॉजीकल है…इसको हम ऐसे समझ सकते हैं….हमारे अंदर दो प्रकार की मेमोरी होती है…एक फैक्चूअल और दूसरा साइकोलॉजीकल….फैक्चूअल बातें हमें डिस्टर्ब नहीं करती हैं…लेकिन साइकोलॉजीकल हमें डिस्टर्ब या पागल कर सकती हैं….जहाँ तक सुविधा और उपयोगिता की बात है भारतीय होने में कोई दिक्कत नहीं है…लेकिन ‘भारत’ शब्द से हमारा जो साइकोलॉजीकल आइडेन्टफकेशन उससे दिक्कत पैदा हो जाती है| फिर हम इस एक शब्द के लिए किसी की जान भी ले सकते हैं…और जान दे भी सकते हैं…| साइकोलॉजीकलि या फिर अस्तित्वगत रूप से हम ‘भारतीय’ या जापानी कुछ भी नहीं हैं…यह सब भेद और खंड राजनितिक है…इसकी अपनी उपयोगिता है…लेकिन जब और देशभक्ति, और हमारा देश महान जैसी मूर्खतापूर्ण बाते करने लगते हैं तब यह हास्यास्पद हो जाता है| मैंने थोड़ी जटिल बातें की है लेकिन उम्मीद है कि इस बार आप इसपर विचार करेंगी….!!!

    Sufi Dhyan Muhammad के द्वारा
    August 16, 2014

    जाते-जाते कुछ और बातें…. जब मैं यह कहता हूँ कि मैं भारतीय नहीं हूँ, तब ऐसा नहीं है कि मैं आपको या किसी और को भारतीय मान रहा होता हूँ….मैं जब किसी विदेशी से मिलता हूँ तो ऐसे नहीं मिलता कि तुम जर्मन हो और मैं एक महान भारतीय हूँ…मैं हमेशा एक व्यक्ति की तरह मिलता हूँ…व्यक्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं होता है… बातें विरोधाभासी लग सकती हैं लेकिन सत्य के साथ हमेशा से यह दिक्कत रहा है सत्य कभी भी एक आयामी नहीं होता है… 

    sinsera के द्वारा
    August 17, 2014

    बात तो घूम फिर कर फिर वहीँ आ गयी न….इत्तेफाक है कि हम भारतीय हैं इसलिए भारत महान है ..इसी तरह हिन्दू, मुस्लिम सिख या ईसाई धर्म/ सम्प्रदाय कि महानताएँ उस में पैदा होने वालों से सुन लीजिये और दूसरे वर्ग के लोगो से धज्जियाँ उड़वा लीजिये…सच है कि उपयोगिता की बात राजनीती है और महानता की बात अंधता है…100 प्रतिशत महानता तो हो ही नहीं सकती…अपनी कमी को न मान कर , पूर्वजों की मेहनत पर थोथा घमंड करना बहुत बड़ी मूर्खता है..यहाँ पर आपसे सहमत हूँ….

jlsingh के द्वारा
August 14, 2014

23 जनवरी के बाद १२ अगस्त को प्रगट हुई हैं… वह भी व्हाट्सऐप में झंड देखने के बाद … आदरणीया दीदी, सादर अभिवादन! आजकल व्हाट्सऐप और फेसबुक का जमाना है सारी देशभक्ति, इन्ही जगहों पर दिखाई जाती है. आखिर हम सभी स्वतंत्र हैं, १०० x १५० mm न्यूनतम याद रखना होगा …अनजाने में की गयी गलती अपराध की श्रेणी में नहीं आता है …झंडे का अपमान प्रमुख हस्तियां भी बहुत करते हैं ..फिर भी हमारा देश महान है ..जय हिन्द जय भारत !

    sinsera के द्वारा
    August 14, 2014

    आदरणीय जवाहर भाई साहब, नमस्कार, मैं तो यहीं थी , आप लोगो को अच्छी अच्छी बातें कहते सुनते देखा करती थी , अपनी तरफ से कहने लायक कुछ था ही नहीं..लेकिन ये हर चेहरे पर एक नए डिज़ाइन का तिरंगा देखना असहनीय हो गया, ऊपर से मोबोला नाम का वायरस….लिखना ज़रूरी था…हाँ, इस के सिवा भी हमारे यहाँ बैठे ठाले लोग क्या क्या नहीं करते..इसीलिए तो…मेरा भारत महान…

shakuntlamishra के द्वारा
August 13, 2014

सरिता जी आपके लेख बहुत कुछ कहते है ,और ज्ञान वर्धक रहते है ,आपने सावधान किया तिरंगे को लेकर बहुत धन्यवाद !

    sinsera के द्वारा
    August 14, 2014

    आदरणीय शकुंतला जी, नमस्कार, मेरी रचनाएँ आपको सार्थक लगती हैं इसके लिए हार्दिक धन्यवाद…इसी प्रकार प्रेम बनाये रखियेगा..

sadguruji के द्वारा
August 13, 2014

आदरणीया सरिता सिन्हा जी ! सादर अभिनन्दन ! आपका स्वागत है ! बहुत दिनों के बाद आपने इस मंच पर कुछ लिखा है ! इस लेख में आपने सही कहा है कि-”जब हमारे भारत देश के नागरिक शिक्षा, तकनीकी, कला या खेल आदि के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर कोई महान उपलब्धि प्राप्त करते हैं और अंतर्राष्ट्रीय पटल पर उनका सम्मान किया जाता है , उस समय बहुत सारे झंडों के बीच में जब भारत के राष्ट्रगान के साथ हमारा तिरंगा शान के साथ सर ऊँचा कर के , झूम के लहराता है , तब उस दृश्य को देख कर समूचे भारतवर्ष के प्रत्येक नागरिक को जो रोमांच होता है, मेरे विचार से यही तिरंगे का वास्तविक सम्मान होता है.”15 अगस्त की सबसे बड़ी बधाई यही है कि आज हम स्वतंत्र हैं ! ये स्वतंत्रता सबको और आपको भी मुबारक हो !

    sinsera के द्वारा
    August 14, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी, नमस्कार, स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें… मेरा इस बीच लिखने से जी ऊब गया था..कारण, इतना ज़्यादा थोथा आदर्शवाद परोसा जा रहा था जो सहन नहीं हो रहा था…व्यस्त थी , इस लिए कुछ दिनों के लिए किनारा कर लिया..लेकिन अब ये हर किसी के चेहरे की जगह झंडे की फोटो देखना भी बस के बाहर हो चला तो विवश हो कर यह लेख लिखा…मेरे ख्याल से दिखावा करने के बजाय नागरिक अपने कार्यों से तिरंगे की शान बढ़ने के बारे में सोचें तो ज़्यादा बेहतर होगा…


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