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दवा करे कोई...

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कितने खुदगर्ज़ हैं खुद गर्ज़ है तो आये हैं,
खिंचे खिंचे से थे जो आज खिंचे आये हैं..


मेरे ख्याल से ही मुस्कुरा उठते थे कभी,
मेरे ख्याल से अब एहसान करने आये हैं..


क्या करे चारागर कोई चारा गर नहीं हो तो,
नब्ज़ पकडे से कहीं नब्ज़ पकड़ आये है..


छोड़िये आप भी क्या बात कहा करते हैं,
बेतुके शे’र पे “क्या बात” कहा करते हैं..


ज़िन्दगीनामा है मेरा बशक्ल-ए-दीवान-ए-पागल,
दीवाने पागल ही हैं जो इस को पढने आये हैं…….


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46 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sonam Saini के द्वारा
November 25, 2013

लिख देते हैं जो भी हम वही शे’र’ हो जाता है अपने घर में तो चूहा भी शेर हो जाता है

    December 2, 2013

    और जो चूहा शेर नहीं होता …………………नज़र है कुछ ऐसी इनकी कि जिसके पड़ते ही वही…………..ढेर हो जाता है…………………हां…………….हां……………..ही……………ही……………

Sufi Dhyan Muhammad के द्वारा
November 24, 2013

‘अपना अपना सोच’ होना गलत नहीं है लेकिन जब आप अपने दिमाग के कूड़ा-कचड़ा को दुसरों के दिमाग में डालने लगते हैं तो दिक्कत पैदा हो जाती है, और जब सद्गुरु जी, अनील जी, जवाहर जी, दिनेश जी, मनोज जी या फिर रंजना जी जैसे उच्य स्तर के लोग इस तरह का काम कर रहे हो तो और भी मुश्किल पैदा हो जाती है…लोग आपको पढ़ते हैं आपको सम्मान देते हैं इसका ये मतलब तो नहीं कि आप लोगों के अज्ञानता का फायदा उठाएंगे…??? ‘गीता को गलत कहना, समझ रहे हैं आप कितनी बेहूदगी की बात है’, बोलने की आजादी है लेकिन गाली देने की नहीं…मैं किसी भी प्रकार के पागलपन के विरोध में हूँ, चाहे वो धार्मिक पागलपन ही क्यों न हो…!! मैं इस देश के प्रतिभावान युवकों और बुद्धिजीवियों से निवेदन करता हूँ कि वो आगे आएं और इन सड़क छाप पंडितों और ज्ञानियों को रास्ता दिखने में मेरी मदद करें…!!!

    sinsera के द्वारा
    November 24, 2013

    प्रसंग और सन्दर्भ के बिना आलेख प्रस्तुत करने के लिए आपके 2 नंबर काटे जाते हैं..

yogi sarswat के द्वारा
November 22, 2013

मुझे इतनी अक्ल नहीं कि मैं इन अशआरों पर कुछ कहूं सकूँ लेकिन आपने लोगों को जो प्रतिउत्तर लिखे हैं , वो बहुत कमाल के हैं !

    sinsera के द्वारा
    November 22, 2013

    आपको अक्ल नहीं हम भी अक्लमंद नहीं , अशआर भी हमारे आपको पसंद नहीं, कमाल कुछ नहीं हमारी यही कहानी है, समझो तो मोती नहीं तो आँख का पानी है……

    के द्वारा
    November 23, 2013

    लड़की (लड़के से): मेरे प्यारा, मेरा सोनू, मोनू, चोनू,मेरा लाडला, मेरे गुलगले, मुझसे शादी करोगे? बोलो बेबी बोलो. लड़का: तुम मुझे प्रपोज कर रही हो या एडॉप्ट.

    sinsera के द्वारा
    November 24, 2013

    एहसान किसीका हम लिया नहीं करते, उधार की ज़िंदगी जिया नहीं करते, यहाँ आना है तो नाम बता कर आइये, बेनामी जोक हम सुना नहीं करते…

Sufi Dhyan Muhammad के द्वारा
November 22, 2013

अपनी जान पर खेल कर, शमां को बचाने आए हैं’ ‘पागल हैं न दीवाने हैं, फिर भी पढने आए हैं, ‘हम जिंदा दिल परवाने हैं’

    sinsera के द्वारा
    November 22, 2013

    न तो पागल हैं न दीवाने हैं, ऊपर से ज़िंदादिल परवाने हैं, ग़लतफ़हमी है या खुशफहमी है, या फिर सूफी के सूफियाने हैं…..

sumit के द्वारा
November 21, 2013

gustakhi maaf, naam लिखना भूल gaya tha …

    sinsera के द्वारा
    November 22, 2013

    गुस्ताखी ऐसे नहीं माफ़ किया करते हम , कान पकड़ा के उठक बैठक भी कराते हम, जो अपना नाम छुपाते हैं वो सभी सुन लें, पकड़े जाने पे सौ बार लिखवाते हैं हम …

के द्वारा
November 21, 2013

ye कौन से शायर ki aatma आपके अंदर समायी hai aap waah kya baat hai, kehne par bhi rok lagayi hai

    sinsera के द्वारा
    November 21, 2013

    खुशामदीद है जो जी में हो सुनाइए, चाहे “क्या बात ” चाहे “बकवास ” कह के जाइये , ये शायर की आत्मा है बेशर्म किस्म की, अंडे टमाटर भी कबूल हैं ले आइये…

mparveen के द्वारा
November 20, 2013

बहुत खूब दी :)

    sinsera के द्वारा
    November 20, 2013

    न बहुत खूब दी और न बहुत खूब ली, बस जो कांटे सी चुभी थी दिल में वही बात कही……………(पता नहीं हम ये क्या क्या बके जाते हैं,आप एक सेकंड रुको हम घंटे भर में आते हैं…… )

seemakanwal के द्वारा
November 18, 2013

छोड़िये आप भी क्या बात कहा करते हैं, बेतुके शे’र पे “क्या बात” कहा करते हैं.. क्या बात है .

    sinsera के द्वारा
    November 19, 2013

    हम अकलमंद नहीं,अकल मंद ही है ज़रा,…..हमें हंस के ज़रा देखो ,न देख के हँसना….आभार सीमा जी :-)

yesme के द्वारा
November 18, 2013

अगरचे गर्ज ही खुदगर्जी है, समझ लो ये हमारी मर्जी है- कभी नश्तर से किया चाक, कभी सीता है, सनम सैयाद है, के दर्ज़ी है ….. ( Guess who ? …… could you ?? ) हा हा हा !

    sinsera के द्वारा
    November 18, 2013

    अरे गुमनाम तेरा नाम गुम न जाये कहीं, कोई खुदगर्ज़ खुद ही गर्ज़ न बन जाये कहीं, कभी guess who कभी could you ये क्या पहेली है, हम क्या जानें तू सनम है के सैयाद या के दर्ज़ी है…………

    yesme के द्वारा
    November 19, 2013

    जिंदगी खुद ही एक पहेली है- हमेशा जान पर ही खेली है- रूठ जाए, बने जंजाल जी का, मान जाए तो इक सहेली है …..

    sinsera के द्वारा
    November 19, 2013

    कैसे छुप छुप के वार करते हैं, एक से दिल नहीं भरता हज़ार करते हैं, हम तो एखलाक के हाथों कटा दें सर अपना , बेवजह आप खंजरों पे धार करते हैं..

    yesme के द्वारा
    November 20, 2013

    यार के यार हैं हम, जां निसार करते हैं- आन पे आएं जो कहीं तो मार करते हैं…. नहीं हैं हम वो जो सनम पे सितम हैं करते, वो शख्स हैं जो रकीबों से प्यार करते हैं …

    sinsera के द्वारा
    November 20, 2013

    निसार जाँ न करें ले के हम करेंगे क्या,मार कर के गुनहगार अब बनेंगे क्या, सितम ही है ये भला और क्या है कहिये तो,यारों के यार आप होते तो छुपते क्या……

    yesme के द्वारा
    November 21, 2013

    छुपाना जख्म भी मजबूरी है, दिखाना जख्म भी मजबूरी है, सुनाएं दर्दे हाल क्या तुमको, खुद से खुद की बनी जो दूरी है….

    sinsera के द्वारा
    November 21, 2013

    न हो मजबूर आप ना कोई मजबूरी है, ये दर्दे हाल की भी मनगढंत स्टोरी है, दिल हथेली पे लिए फिरते हो बाज़ारों में आप , और अपने हैं जो कहते हो उनसे दूरी है…..

    yesme के द्वारा
    November 21, 2013

    समाएंगे कहाँ टुकड़े हजार इसपर यार, दिल नहीं जान लिए फिरते हैं हथेली पे… आपकी तो क्या कहें, दिल्लगी है सूझ रही, रोना आता है हमें अपनी इस पहेली पे…

    sinsera के द्वारा
    November 21, 2013

    अरे रे इस तरह न रोइये आँसू न बहाइये , चुप हुए जाते हैं हम आप भी चुप हो जाइये, जो दोस्त होते मेरे तो नाम बता कर जाते, हमें इस लायक न समझा आपने , खैर जाइये…..

    yesme के द्वारा
    November 22, 2013

    बेशर्म आत्माओं में अपनी भी बात हो, कुछ गुत्थमगुत्था हो तो कहीं मुक्कालात हो… ऐसे ना भगाओ हमें करते तुम्हें सलाम, अजी नामवाम में क्या रक्खा है, हम तो हैं, आप के गुलाम…

    yesme के द्वारा
    November 22, 2013

    चलो रुखसत करो, बेजार हो तो जाने दो…काट लेंगे कहीं, तनहाइयों को आने दो…बारहा चाहा के हमराह बन के चलते हम, ना थी तक़दीर अपनी क्या कहें, अब जाने दो… मिलेंगे, यूँ ही… चलते-चलते !

    sinsera के द्वारा
    November 22, 2013

    फ़राज़दिल हैं हम किसी को न यूँ भगाते हैं, अपनी मर्ज़ी से आने वाले जा न पाते हैं, हम वो मेंहदी हैं जिन नाखूनों के सर चढ़ जाएं, कट भी जाएं तो मेरा रंग न छुड़ा पाते हैं…

    sinsera के द्वारा
    November 22, 2013

    अपनी मर्ज़ी से आये हमारी मर्ज़ी से जाना होगा,न मुलाकात न मुक्कालात का बहाना होगा, चला करेगा ये सिलसिला यूँही क़यामत तक, वर्ना जाने से पहले नाम आपको बताना होगा..

    yesme के द्वारा
    November 22, 2013

    कमाल है के नाम हमको बताना होगा ? दिल से पूछो, वहीँ कुछ अपना फ़साना होगा… क्यूँ करना चाहते रुसवा हमें सरे महफ़िल, लिहाज़ कुछ तो करो, हँसता ज़माना होगा …

    sinsera के द्वारा
    November 22, 2013

    दिल हमारा एक बरसों पुराना गोदाम है, डम्प हैं फाइलें कितनी और भी काम हैं, अता पता कुछ दें तो फ़ाइल आपकी भी मिल जाती, हम समझ जाते कि आपका क्या नाम है……

    yesme के द्वारा
    November 23, 2013

    ख़ुश रहो फाइलों के ढेर में, अब हम तो चले… खाक़ परदेस की छानेंगे, वतन छोड़ चले… कोई भूले से हमें पूछे तो समझा देना, जो दवा लेके आए थे हमारे दर्देदिल की, हमारी बेरुखी से खुद बीमार हो के चले….

    sinsera के द्वारा
    November 23, 2013

    जाने आप कौन हैं हम से खार खाये बैठे हैं, बताते नाम नहीं, बेरुखी का दोष हमको देते हैं,न तो अलाउद्दीन हम हैं और न पद्मिनी हैं आप, जाने क्यों फिर भी शीशे में छुपे बैठे हैं…

yamunapathak के द्वारा
November 17, 2013

सरिता जी सारे शेर बहुत खूबसूरत हैं.आपकी रचनाएं हैम सब पसंद करते हैं .इंतज़ार रहता है. साभार

    sinsera के द्वारा
    November 18, 2013

    ऐ नासमझ तुमको ना समझ आयेगी, खूब सूरत बनी है, कहाँ के खूबसूरत हैं हम…..

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
November 16, 2013

वाह! वाह! क्या खूब कहा आपने / बहुत सुन्दर ग़ज़ल / बधाई /

    sinsera के द्वारा
    November 17, 2013

    हम कहें आप सुनें , आप कहे और सुनें हम…ये कहा सुनी , कहाँ सुनी होगी…….

sadguruji के द्वारा
November 16, 2013

आदरणीया सरिता सिन्हा जी.आप की शायरी अच्छी लगी.बहुत दिनों बाद आप ने कुछ कहा है.

    sinsera के द्वारा
    November 17, 2013

    एक शायर था हुआ करता था मर गया चंद रोज़ पहले, दफ़न कर लें उसे पहले ग़ज़ल फिर और कभी …

omdikshit के द्वारा
November 16, 2013

सरिता जी, मैंने तो पढ़ लिया आप चाहे जो समझें…..बहुत सुन्दर! बहुत-बहुत सुन्दर !!

    sinsera के द्वारा
    November 17, 2013

    हम जान लें या बूझ लें या समझ लें जो भी, आप जो हैं वही रहेंगे हम समझ लें जो भी…(गुस्ताखी माफ़.. :-) )

Imam Hussain Quadri के द्वारा
November 16, 2013

बहुत ही अच्छा अंदाज़ है दीवाना तो दीवाना है ये बात सही है दीवाना बहुत सोच कर दीवाना बना है

    sinsera के द्वारा
    November 17, 2013

    गुस्ताखियां माफ़ हुआ करती हैं दीवाने को , अब कभी होश न आये दुआ करे कोई…..


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